GurjarCommunity

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Author name: parvendraiitr

गुर्जर गोत्र

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ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चंदपुरी एमवीसी, वीएसएम (22 नवंबर 1940 - 17 नवंबर 2018) एक वीर चक्र (वीसी) सम्मानित भारतीय सेना के अधिकारी थे। उन्होंने अपनी बहादुरी और साहस के लिए प्रसिद्धि प्राप्त की और उनके योगदान से देश को गर्व महसूस कराया।

ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चंदपुरी

ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चंदपुरी एमवीसी, वीएसएम (22 नवंबर 1940 – 17 नवंबर 2018) एक वीर चक्र (वीसी) सम्मानित भारतीय सेना के अधिकारी थे। उन्होंने अपनी बहादुरी और साहस के लिए प्रसिद्धि प्राप्त की और उनके योगदान से देश को गर्व महसूस कराया।

कमल राम, एक गुर्जर जनसेनानी थे जो देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जन्म 17 दिसंबर 1924 को हुआ था और उनका निधन 1 जुलाई 1982 को हुआ। कमल राम गुर्जर जनजाति के थे और उनका जीवन प्रेरणादायी और उत्कृष्टता का उदाहरण है।

कमल राम, एक गुर्जर

कमल राम, एक गुर्जर जनसेनानी थे जो देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जन्म 17 दिसंबर 1924 को हुआ था और उनका निधन 1 जुलाई 1982 को हुआ। कमल राम गुर्जर जनजाति के थे और उनका जीवन प्रेरणादायी और उत्कृष्टता का उदाहरण है।

किरोरी सिंह बैंसला

किरोरी सिंह बैंसला

किरोड़ी सिंह बैंसला की मृत्यु ने गुर्जर समुदाय को एक विशाल दुःख पहुंचाया है। उनके नेतृत्व में गुर्जर समुदाय ने अपनी पहचान बनाई थी और उनके बिना इस उपकरण की अपूर्णता महसूस हो रही है। उनके जीवन के उदाहरण से हमें यह सिख मिलती है कि सामाजिक और आर्थिक न्याय के लिए लड़ने का संकल्प हमेशा बनाए रखना चाहिए।

कोतवाल धन सिंह गुर्जर

कोतवाल धन सिंह गुर्जर

कोतवाल धन सिंह गुर्जर ने अपनी सेवा को दिल्ली दरबार में भी दिखाया। वह मुग़ल साम्राज्य के समय मेरठ के कोतवाली पद पर रहे और वहां के अधिकारों का प्रबंधन करते थे।

विजय सिंह पथिक

विजय सिंह पथिक

विजय सिंह पथिक, जिन्हें भूप सिंह गुर्जर के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रमुख गुर्जर समाज के नेता और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे 27 फरवरी, 1882 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के नगर गांव में जन्मे।

नैन सिंह नगर गुर्जर

राजा नैन सिंह नागर

नैन सिंह नगर गुर्जर एक प्रतिभाशाली और न्यायप्रिय राजा थे, जो अपने राज्य के लोगों के कल्याण और समृद्धि के लिए सभी संसाधनों का सराहनीय उपयोग करते थे। उनका योगदान मेरठ के इतिहास में महत्वपूर्ण है और उन्हें उनके नेतृत्व और प्रगतिशील दृष्टिकोण के लिए सम्मानित किया जाता है।

प्रतापराव गुजर, शिवाजी महाराज की सेना के सैन्य नेता थे। उनके वीरता और योद्धा दृष्टिकोण के लिए वे मशहूर हुए थे। प्रतापराव गुजर ने शिवाजी महाराज के साथ कई महत्वपूर्ण युद्धों में भाग लिया और उनके सेना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने स्वयं वीरता के उदाहरण स्थापित किए और अपनी शौर्यपूर्ण कार्यवाही के लिए प्रशंसा प्राप्त की। प्रतापराव गुजर ने शिवाजी महाराज के अधीन विजयों के दौरान कठिनाइयों का सामना किया और दुश्मनों को परास्त किया। उनकी साहसिकता, नेतृत्व कौशल और त्याग भावना ने उन्हें एक महान सैनिक के रूप में मशहूरी प्राप्त की। प्रतापराव गुजर शिवाजी महाराज की सेना में अपने वीरता और सेवानिवृत्ति के लिए प्रसिद्ध हुए। उनके योगदान ने उन्हें गुर्जर समुदाय में एक महान व्यक्ति बना दिया है जो शौर्य और सेवा का प्रतीक बनकर अभिभूत हुआ है। प्रतापराव गुजर, शिवाजी महाराज की सेना के सैन्य नेता थे। उनका नाम इतिहास में महान वीरता और योद्धा स्पृहा के साथ जुड़ा हुआ है। वे शिवाजी महाराज के द्वारा बनाई गई हिंदवी सेना के मुख्य सैन्य नेता थे और उनके नेतृत्व में युद्ध के कई ऐतिहासिक अध्याय लिखे गए। प्रतापराव गुजर के प्रमुख युद्ध समारोहों में से एक था "पानीपत का युद्ध" जो 1761 में हुआ था। इस युद्ध में उन्होंने मराठा सेना की नेतृत्व किया था और उनकी साहसिकता और निपुणता के कारण उन्हें विजयी घोषित किया गया था। प्रतापराव गुजर के योगदान के कारण, वे शिवाजी महाराज की सेना में महान योद्धा के रूप में याद किए जाते हैं और उनके नाम पर भारतीय इतिहास में एक गर्वनीर अध्याय लिखा गया है। वे एक प्रमुख मराठा सेनानायक थे और शिवाजी महाराज के विश्वासपात्र अधिकारी रहे हैं। प्रतापराव गुजर को शिवाजी महाराज की सेना के प्रमुख अधिकारियों में से एक माना जाता है और उन्होंने बहुत साहस और वीरता के साथ महाराष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी। प्रतापराव गुजर ने शिवाजी महाराज के तत्वों के पक्ष में बहुत सारी महत्वपूर्ण युद्धों में भाग लिया। उन्होंने बाताप युद्ध, पानीपत युद्ध, वासई युद्ध, और कई अन्य युद्धों में शिवाजी महाराज की सेना को अग्रणी भूमिका निभाई। प्रतापराव गुजर एक अत्यंत बहादुर और योद्धा थे, जिन्होंने अपनी सेना को बहुत युद्ध प्रवीणता और सामरिक रणनीति से निर्देशित किया। उनका योगदान मराठा साम्राज्य के विस्तार और उसकी स्थापना में महत्वपूर्ण था। प्रतापराव गुजर की वीरता और नेतृत्व की कहानियां आज भी महाराष्ट्र के इतिहास में महत्वपूर्ण हैं और उन्हें मराठा समाज में गर्व के साथ याद किया जाता है।

प्रतापराव गुजर

प्रतापराव गुजर, शिवाजी महाराज की सेना के सैन्य नेता थे। उनके वीरता और योद्धा दृष्टिकोण के लिए वे मशहूर हुए थे।   प्रतापराव गुजर ने शिवाजी महाराज के साथ कई महत्वपूर्ण युद्धों में भाग लिया और उनके सेना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने स्वयं वीरता के उदाहरण स्थापित किए और अपनी शौर्यपूर्ण कार्यवाही के लिए …

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